बस्ता बेहद भारी है
ढोना तो लाचारी है
पढकर याद करना है
रटना आज भी जारी है
श्यामपट्ट के धुंधले आखर
अब भी एक बीमारी है
गुरूजी के हाथ में डंडा
जाने कैसी यारी है
कान पकड़ कर उठक-बैठक
मुर्गा बनना जारी है
छुट्टी में जो घंटी बजती
हमको लगती प्यारी है.
-मनोहर चमोली 'मनु'
[30-09-2010]
ढोना तो लाचारी है
पढकर याद करना है
रटना आज भी जारी है
श्यामपट्ट के धुंधले आखर
अब भी एक बीमारी है
गुरूजी के हाथ में डंडा
जाने कैसी यारी है
कान पकड़ कर उठक-बैठक
मुर्गा बनना जारी है
छुट्टी में जो घंटी बजती
हमको लगती प्यारी है.
-मनोहर चमोली 'मनु'
[30-09-2010]