10/12/2013

सादगी से दीवाली.Nov. 1st 2013. चंपक

सादगी से दीवाली

Manohar Chamoli 'manu'

 
‘‘चंपकवन में मेरे आदेश के बिना पत्ता भी नहीं हिलना चाहिए। फिर भला किस की हिम्मत हुई जिसने यह कहलवा दिया कि दीवाली में धूमधड़ाका नहीं होगा। बताओ।’’ राजा शेर सिंह ने दहाड़ते हुए पूछा।

बैडी सियार शेर सिंह का सलाहकार था। वह बोला-‘‘ महाराज। ये सब चीकू खरगोश का कियाधरा है। उसने ही चंपकवन में यह अफवाह फैलाई है कि दुनिया खत्म हो जाएगी। यदि हम बमपटाखे जलाते हैं तो एक दिन हम सब मर जाएंगे।’’
शेरसिंह दहाड़ा। उसने आदेश देते हुए कहा-‘‘चीकू को जिन्दा मेरे सामने पेश किया जाए। अभी के अभी।’’
बैडी सियार और कल्लू लोमड़ को इसी अवसर की तलाश थी। वह दौड़कर चीकू खरगोश को पकड़ कर ले आए।
कल्लू लोमड़ ने शेर सिंह से कहा-‘‘ये लीजिए महाराज। यही है आपका गुनहगार। इसी ने चंपकवन में घूमघूम कर कहा है कि बमपटाखे नहीं जलाने चाहिए।’’
शेर सिंह चीकू खरगोश को घूरते हुए दहाड़ा-‘‘हम्म। तो तुम हो। मूर्ख दीवाली साल में एक ही बार तो आती है। चंपकवन में धूमधड़ाका नहीं होगा तो आसपास के जंगलवासी क्या कहेंगे। क्या मेरे वतन में इतनी कंगाली आ गई है?’’
चीकू ने विनम्रता से जवाब दिया-‘‘मेरे महाराज। दीवाली सादगी से मनाएंगे तो हमारा चंपकवन और भी खुशहाल हो जाएगा। दूसरी बात यदि महाराज। दीपावली में बमपटाखे जलाते रहे तो एक दिन ऐसा आएगा कि आप भूखे ही रह जाओगे।’’
शेर सिंह के कान खड़े हो गए। वह चैंकते हुए बोला-‘‘मैं भूखा रह जाऊंगा? कैसे?’’
चीकू ने हाथ जोड़ते हुए कहा-‘‘महाराज। दीपावली में बमपटाखे जलाने से ध्वनि प्रदूषण होता है। कई छोटेबड़े जीवजन्तु तो डर के मारे कई दिनों तक भूखेप्यासे ही रह जाते हैं। कईयों के कान हमेशा के लिए बहरे हो जाते हैं। दहशत से कई तो मर भी जाते हैं।’’
शेर सिंह दहाड़ा-‘‘उससे मुझे क्या? तुम तो यह बताओ कि मैं भूखा भला क्यो रह जाऊंगा यदि दीपावली पर पटाखे जलते रहे।’’
चीकू ने कहा-‘‘वही तो बता रहा हूं महाराज। आप तो जानते ही हैं कि प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। चंपकवन की झील का पानी लगातार घट रहा है। इस बार तो बारिश भी नहीं हुई। बम पटाखों से निकलने वाली गैसें और प्रदूषण से उत्सर्जित कार्बन ने ओजोन परत में सुराख कर दिया है। ये सुराख बढ़ता ही जा रहा है।’’
कल्लू लोमड़ बीच में ही बोल पड़ा-‘‘महाराज। ये चीकू है। चालाक। अब ये आपको कहानी सुनाने लगा है।’’
बैडी सियार भी कल्लू लोमड़ की हां में हां मिलाते हुए कहने लगा-‘‘लगता है यह अपनी जान बचाने का कोई तरीका खोज रहा है।’’
शेर सिंह ने चीकू खरगोश से कहा-‘‘ये ओजोन परत क्या है? उससे हमारा क्या लेनादेना?’’
चीकू ने बताया-‘‘महाराज आसमान में एक छतरीनुमा विशालकाय परत है। जिस प्रकार छतरी हमें धूपबारिश से बचाती है उसी प्रकार ये ओजोन परत सूरज की तीव्र और नुकसान पहुंचाने वाली किरणों को धरती पर आने से रोकती है। लेकिन इस ओजोन परत पर सुराख हो गया है। यह सुराख बढ़ता ही जा रहा है। अब महाराज। यदि हम सुराख वाली छतरी लेकर घूमेंगे तो बारिश में भीग जाएंगे। इसी प्रकार अब सूरज की तीव्र किरणे उस सुराख से सीधे धरती तक आ रही है। इस कारण धरती पर असाधारण बदलाव दिखाई देने लगे हैं।’’
शेर सिंह ने पूछा-‘‘बदलाव! कौन से?’’
चीकू ने बताया-‘‘जैसे महाराज। अत्यधिक गर्मी का होना। अत्यधिक बारिश का होना। सूखा पड़ना या कहीं बाढ़ आना।’’
शेर सिंह ने पूछा-‘‘मगर बमपटाखों से ओजोन परत का क्या संबंध है?’’
चीकू बोला-‘‘संबंध है महाराज। बमपटाखों को जलाते समय इनसे मैग्नेशियम कार्बन मोनो अक्साइड,कापर मैग्नेशियम सल्फर नाइट्रोजन भारी मात्रा में निकलती है। इन गैसों की मात्रा वायुमंडल में बढ़ जाती है। प्रदूषण बढ़ता है और ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है।’’
शेर सिंह बोला-‘‘हम्म। समझ गया। लेकिन मेरे भूखे रह जाने का क्या मतलब है?’’
चीकू ने कहा-‘‘जी महाराज। बताता हूं। महाराज। यदि ओजोन परत का सुराख बढ़ता ही जाएगा तो सूरज की किरणे सीधे हम तक पहुंचने लगेंगी। वे किरणें बेहद हानिकारक होती हैं। धरती गर्म से और गर्म हो जाएगी। हमारा जीना मुहाल हो जाएगा। घास हरेभरे वृक्ष झुलस कर सूख जाएंगे। बारिश नहीं होगी। हम जैसे शाकाहारी जीव बिना घासपात के मर जाएंगे। महाराज जब हम ही नहीं रहेंगे तो आप मांसाहारी भोजन कैसे कर पाएंगे?’’
शेर सिंह गुर्राया-‘‘ ये बात है। चीकू तुम सही कहते हो। आज से तुम चंपकवन के ही नहीं मेरे भी सलाहकार बनाए जाते हो।’’
बैडी सियार बीच में ही बोल पड़ा-‘‘मगर महाराज। आपका सलाहकार तो मैं हूं।’’
शेर सिंह दहाड़ा-‘‘चुप रहो। तुम और कल्लू लोमड़ अभी जाओ। समूचे चंपकवन में ऐलान करवा दो कि इस बार दीपावली सादगी से मनाई जाएगी। यही नहीं दीपावली के अवसर पर हम चंपकवन में विशाल वृक्षारोपण के लिए गड्ढे खुदवाएंगे। पौधशाला का निर्माण कराएंगे। बरसात आते ही विशाला वृक्षारोपण किया जाएगा। जाओ।’’
बैडी सियार और कल्लू लोमड़ दुम दबाकर चंपकवन की ओर दौड़ पड़े। वहीं दरबारी नये सलाहकार के स्वागत में चीकू खरगोश के लिए तालियां बजा रहे थे। 000

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