09/05/2012

कैसे रात गुजारी है....


 तुझसे कैसी यारी है
सबको लगती भारी है

दाना पानी बस हुआ
अब अपनी तैयारी है

कैसे अब बतलाऊँ मैं
कैसे रात गुजारी है

पीछे से है वार किया
ये कैसी दिलदारी है

मेरा है तो आ भी जा
फिर क्यों परदादारी है

वो भी रूठ गया अब तो
कैसी दुनियादारी है

क्या पछताना अब मैंने
जीती बाज़ी हारी है

न जाऊँगा बिन बुलाए
मेरी भी खुद्दारी है

-मनोहर चमोली ‘मनु’
  डायरी से...13 मई 2010


मेरा मेल-manuchamoli@gmail.com है। ब्लाॅग लिंक है- http://alwidaa.blogspot.in

2 टिप्‍पणियां:

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