27 सित॰ 2010

विचार

"सोचो ज्यादा, बोलो कम, लिखो और भी कम.."
ये बात हजम हुई..? नहीं न ! . यदि हाँ. तो साजा जरूर कीजिये.

1 टिप्पणी:

  1. पर पढ़ो जितना ज़्यादा हो सके। यह भी साझा करने की जरूरत है।

    शुक्रिया।

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यहाँ तक आएँ हैं तो दो शब्द लिख भी दीजिएगा। क्या पता आपके दो शब्द मेरे लिए प्रकाश पुंज बने। क्या पता आपकी सलाह मुझे सही राह दिखाए. मेरा लिखना और आप से जुड़ना सार्थक हो जाए। आभार! मित्रों धन्यवाद।