28/09/2010

कविता : कहते हैं कि लड़कियाँ-----मनोहर चमोली 'मनु'

कहते हैं कि लड़कियाँ
चिड़िया के समान होती हैं
वे एक जगह नहीं टिकतीं
फुर्र हो जाती हैं
लेकिन मैंने तो देखी हैं
ऐसी कई लड़कियाँ
जो उड़ती ही नहीं
वे जड़ हो गईं हैं
अपने बूढ़े माता-पिता के लिए
नन्हे भाई-बहिनों की खातिर
तो मैं कैसे मान लूं
कि लड़कियाँ
चिड़िया के समान होती हैं
वे एक जगह नहीं टिकती
फुर्र हो जाती हैं---फुर्र हो जाती हैं ! ! ! 
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29-9-2010 -मनोहर चमोली 'मनु'

11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

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  2. बडी सच्ची और गहरी बात कह दी।

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  3. सच कुछ लडकियाँ होती ही हैं ऐसी, कर देती हैं जीवन न्यौछावर अपनों पे।

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यहाँ तक आएँ हैं तो दो शब्द लिख भी दीजिएगा। क्या पता आपके दो शब्द मेरे लिए प्रकाश पुंज बने। क्या पता आपकी सलाह मुझे सही राह दिखाए. मेरा लिखना और आप से जुड़ना सार्थक हो जाए। आभार! मित्रों धन्यवाद।