26/03/2012

पौड़ी में शिक्षा की अलख : रेव0 जे0एच0 मैसमोर....


-मनोहर चमोली ‘मनु’
    170 साल पहले जब ‘पौड़ी’ को गढ़वाल जिले का मुख्यालय बनाया गया होगा, तब पौड़ी और आस-पास की क्या आबादी रही होगी? शिक्षा का क्या स्तर रहा होगा? यह यक्ष प्रश्न हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पौड़ी में शिक्षा की अलख अमेरिकी मिशनरी ने जलाई थी। मिशनरी रेव0 हेनरी मेंसल ने सन् 1865 में यहां एक स्कूल खोला था। इस स्कूल का स्वागत उस समय भाषा-बोली के स्तर पर प्रभावपूर्ण नहीं रहा। स्थानीय शिक्षक पं0 पुरुषोत्तम दत्त चन्दोला के स्कूल से जुड़ने के बाद 1867 में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 30 हो गई। बाद में मिशनरी बिशप जे0एम0 थोवर्ण ने इस स्कूल के विकास में योगदान दिया।
 उन्होंने चोपड़ा टी इस्टेट से एक हजार रुपये में 14 एकड़ भूमि खरीदी। बाद में विस्तार के लिए और भूमि खरीदी गई। 1869 से 1872 तक हेनरी मैंसल ने स्कूल की बागडोर संभाली। बाद में पी0टी0 विल्सन और डा0 एस0एस0 डीस को स्कूल के संचालन का दायित्व मिला। 1871 में ही चोपड़ा कोठी का निर्माण हो चुका था। वर्ष 1920 तक मैसमोर स्कूल इसी चोपड़ा कोठी में संचालित हुआ।
    बिशप थोवर्न के बाद प्रसिद्व शिक्षक मिशनरी रेव0 जे0एच0 मैसमोर पौड़ी आये। मैसमोर ने ही इस स्कूल को वर्ष 1902 में हाई स्कूल किया। रेव0 डी0 ए0 चैफीन का सहयोग अविस्मरणीय है। वे पहले से ही स्कूल में हेड मास्टर थे। हाई स्कूल के पहले हेडमास्टर वे ही रहे। जे0एच0 मैसमोर कई वर्षों तक पौड़ी में ही रहे। मैसमोर ने बीमार रहते हुए भी सन् 1911 में चर्च का निर्माण करवाया। शिक्षा के प्रति उनका अदम्य उत्साह ही था कि बीमार रहते हुए भी छात्रों को पढ़ाते थे। मैसमोर की मृत्यु के बाद 1912 में पी0एस0 हाॅइड पौड़ी आये। हाईस्कूल भूकंप में क्षतिग्रस्त होने के कारण मिडिल में बदल दिया गया।
    मिशन सुपरिन्टेन्डेन्ट वीक्स ने सरकारी सहायता से स्कूल का पुननिर्माण कराया। 1922 में नया भवन तैयार हुआ। उस समय इस भव्य और अनोखे भवन के निर्माण पर 1 लाख 80 हजार रुपये की लागत आई। 1902 में सरकार ने इसे हाई स्कूल की मान्यता दी। पौड़ी ही नहीं चमोली और आस-पास के क्षेत्र से भी छात्र यहां पढ़ने के लिए आने लगे। पहले बैच में छात्र कुलानंद थपलियाल, दुर्गादत्त ममगाई, मनोहर जोशी और बख्तावर सिंह शामिल थे। शिक्षा की लोकप्रियता के कारण 1926 में इस विद्यालय में छात्र संख्या 4 से लेकर 400 तक पहुंच गई। उन्हें पढ़ाने के लिए 23 अध्यापक नियुक्त थे।
    मैसमोर स्कूल की काॅलेज की यात्रा का इतिहास स्वर्णिम रहा है। यहां के छात्र राजनीजि, प्रशासन, समाज, साहित्य और कला के क्षेत्र में प्रसिद्धि पा चुके हैं। 70 सालों तक इस स्कूल में सेवा देने वाले चैफीन परिवार के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। वर्ष 1944 में स्थानीय जनता ने सरकार से इसे इण्टरमीडिएट काॅलेज की मान्यता देने की मांग की। 1950 में सरकार ने इण्टर संकाय मिशन को सौंप दिया। 1974 में इस स्कूल का प्रांतीयकरण हुआ।  

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