05/10/2010

-दो शिशु गीत, -'सूरज'---'टर्र टर्र क्यों'

सूरज


बहुत दूर से सूरज आया
और उजाला साथ में लाया
फिर धरती ने ली अंगड़ाई
और हवा भी मुस्काई
अगर न होता सूरज साथ
दिन में भी हो जाती रात।




टर्र टर्र क्यों

मेढक जी ओ मेढक जी
कहाँ-कहाँ रहते हो जी
टप टप टप टप बारिश में
टर्र टर्र क्यों करते हो जी
घर तुम्हारा पानी में
किस तरह सोते हो जी।

-मनोहर चमोली 'मनु'

5-10-2010

2 टिप्‍पणियां:

यहाँ तक आएँ हैं तो दो शब्द लिख भी दीजिएगा। क्या पता आपके दो शब्द मेरे लिए प्रकाश पुंज बने। क्या पता आपकी सलाह मुझे सही राह दिखाए. मेरा लिखना और आप से जुड़ना सार्थक हो जाए। आभार! मित्रों धन्यवाद।