23/04/2012

दिल मेरा दुखाते हो


 पहले तो बुलाते हो
काहे फिर रुलाते हो
 
दिन अवकाश के भी तो
घर में दफ्तर लाते हो
 
ख़ुद नज़रे मिलाते हो
फिर क्यों सिर झुकाते हो
 
खटपट रोज़ करते हो
झुककर फिर मनाते हो
 
उसका नाम ले लेकर
दिल मेरा दुखाते हो
....................
                                         -मनोहर चमोली ‘मनु’
                                                  -21. 4. 2012. सुबह सवेरे.

3 टिप्‍पणियां:

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